धूम्रपान से दूर रहने वालों को भी क्यों हो रहा लंग इंफेक्शन? जानें प्रदूषण, वायरस और बैक्टीरिया का कनेक्शन
- Shiv Kumar
- 21 Sep, 2026
धूम्रपान को फेफड़ों से जुड़ी कई बीमारियों का प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि जो लोग स्मोकिंग नहीं करते, उन्हें फेफड़ों में संक्रमण नहीं हो सकता। लंग इंफेक्शन किसी भी उम्र में हो सकता है और इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण से लेकर कमजोर इम्यून सिस्टम, प्रदूषण और धूल-रसायनों के संपर्क तक कई स्थितियां फेफड़ों को प्रभावित कर सकती हैं। लंग इंफेक्शन होने पर खांसी, बुखार, सीने में दर्द, कमजोरी और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में अगर सांस से जुड़ी समस्या लगातार बनी रहती है, तो उसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर डॉक्टर से सलाह और जरूरी जांच कराने से समस्या की पहचान में मदद मिल सकती है।
वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन भी हो सकते हैं कारण
फ्लू, कोविड-19 और दूसरे श्वसन वायरस फेफड़ों में संक्रमण का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा कुछ बैक्टीरिया भी फेफड़ों को संक्रमित कर सकते हैं और निमोनिया जैसी स्थिति पैदा कर सकते हैं। बैक्टीरियल इंफेक्शन में तेज बुखार, लगातार खांसी और सीने में दर्द जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। संक्रमण की गंभीरता व्यक्ति की स्थिति और उसके स्वास्थ्य पर निर्भर कर सकती है। फंगल इंफेक्शन भी फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है। खासकर जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, उनमें इसका खतरा अधिक हो सकता है। लंबे समय तक खांसी, कमजोरी और सांस लेने में परेशानी इसके संभावित लक्षणों में शामिल हैं।
कमजोर इम्यूनिटी से बढ़ सकता है संक्रमण का जोखिम
शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर होने पर संक्रमण से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। डायबिटीज, लंबे समय से चल रही कुछ बीमारियां या कुछ दवाओं के इस्तेमाल के कारण भी इम्यून सिस्टम पर असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में फेफड़ों के संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए लगातार खांसी, सांस फूलना या कमजोरी जैसे लक्षण बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी हो सकता है।
प्रदूषण, धूल और केमिकल्स से भी फेफड़े प्रभावित
लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इससे सांस लेने में परेशानी और दूसरी श्वसन समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसी तरह कार्यस्थल पर धूल, धुआं, गैस या कुछ रसायनों के लगातार संपर्क में रहने से फेफड़ों में जलन और सूजन हो सकती है। लंबे समय तक ऐसा संपर्क फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है।
संक्रमित व्यक्ति से संपर्क में रहने पर भी सावधानी
कुछ श्वसन संक्रमण संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान निकलने वाली बूंदों के जरिए फैल सकते हैं। ऐसे में संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से संक्रमण का जोखिम हो सकता है। धूम्रपान नहीं करने वाले लोगों को भी लगातार बने रहने वाले सांस संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेकर उचित जांच और उपचार कराना मददगार हो सकता है।
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