रोजाना जिम जाने और ज्यादा प्रोटीन लेने से किडनी पर पड़ता है दबाव? जानें किन लोगों को रहना चाहिए सतर्क
- Shiv Kumar
- 30 Oct, 2026
जिम जाने वाले कई लोग मांसपेशियों को मजबूत बनाने और शरीर को फिट रखने के लिए अपनी डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ा रहे हैं। इसके लिए अंडे, पनीर और चिकन जैसे खाद्य पदार्थों के साथ प्रोटीन पाउडर का भी इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा प्रोटीन लेना या बिना जानकारी के सप्लीमेंट का सेवन करना सेहत के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। खासतौर पर पहले से किडनी की बीमारी, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे लोगों को अपनी डाइट को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। इसके अलावा, बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉइड या संदिग्ध सामग्री वाले सप्लीमेंट लेना भी नुकसानदेह हो सकता है। ऐसे में सवाल है कि क्या रोजाना जिम जाने और अधिक प्रोटीन लेने से किडनी पर दबाव पड़ता है?
ज्यादा प्रोटीन लेने से किडनी पर क्या असर पड़ता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रोटीन के पाचन के बाद शरीर में नाइट्रोजन युक्त अपशिष्ट पदार्थ बनते हैं। किडनी खून को फिल्टर करके इन अपशिष्टों को पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकालने में मदद करती है। जब कोई व्यक्ति जरूरत से अधिक प्रोटीन लेता है, तो किडनी का फिल्ट्रेशन संबंधी काम बढ़ सकता है। स्वस्थ किडनी वाले लोगों में सामान्य तौर पर अधिक प्रोटीन लेने से किडनी खराब होने का सीधा संबंध साबित नहीं है, लेकिन पहले से क्रोनिक किडनी डिजीज से पीड़ित लोगों के लिए ज्यादा प्रोटीन नुकसानदायक हो सकता है। इसके अलावा, कठिन व्यायाम के दौरान पर्याप्त पानी नहीं पीना और बार-बार डिहाइड्रेशन होना भी किडनी पर असर डाल सकता है। इसलिए प्रोटीन की मात्रा तय करते समय उम्र, वजन, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य की स्थिति का ध्यान रखना जरूरी है।
क्या रोज जिम जाने वालों को किडनी टेस्ट कराना चाहिए?
अगर आप नियमित व्यायाम करते हैं और संतुलित आहार लेते हैं, तो केवल जिम जाने या प्रोटीन खाने की वजह से बार-बार किडनी की जांच कराने की जरूरत नहीं होती। हालांकि, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा या किडनी की बीमारी का पुराना इतिहास होने पर डॉक्टर की सलाह से समय-समय पर जांच करानी चाहिए। किडनी की कार्यक्षमता का आकलन करने के लिए डॉक्टर सीरम क्रिएटिनिन और ईजीएफआर टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। सीरम क्रिएटिनिन के स्तर के आधार पर ईजीएफआर से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि किडनी खून को कितनी अच्छी तरह फिल्टर कर रही है। इसके अलावा, यूरिन एल्ब्यूमिन-टू-क्रिएटिनिन रेशियो यानी यूएसीआर टेस्ट से पेशाब में एल्ब्यूमिन की मात्रा का पता लगाया जाता है। इन जांचों की जरूरत व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और जोखिम के आधार पर तय की जाती है।
प्रोटीन पाउडर लेते समय किन बातों का रखें ध्यान?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हर व्यक्ति को प्रोटीन पाउडर लेने की जरूरत नहीं होती। कई लोगों की प्रोटीन संबंधी जरूरतें सामान्य भोजन से ही पूरी हो सकती हैं। अंडे, दूध, दही, पनीर, दालें और अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ डाइट में शामिल किए जा सकते हैं। अगर आप प्रोटीन सप्लीमेंट लेना चाहते हैं, तो पहले डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन से सलाह लें। उत्पाद खरीदते समय उसकी गुणवत्ता, सामग्री और लेबल की जांच करें। बिना प्रमाणित या संदिग्ध सप्लीमेंट से बचें, क्योंकि कुछ उत्पादों में घोषित सामग्री से अलग या हानिकारक पदार्थ मिलाए जा सकते हैं। स्टेरॉइड वाले उत्पादों को सामान्य प्रोटीन सप्लीमेंट समझकर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही व्यायाम के दौरान पर्याप्त पानी पीना और शरीर की जरूरत के अनुसार प्रोटीन लेना जरूरी है। पैरों या चेहरे पर सूजन, पेशाब में लगातार झाग या खून दिखाई देने पर डॉक्टर से जांच कराएं। इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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