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वोटिंग से पहले अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा, केश्म द्वीप पर पांच धमाके और दो अमेरिकी ड्रोन गिराने का दावा

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अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान के केश्म द्वीप पर पांच धमाकों की खबर है। अमेरिकी अधिकारियों ने सीमित सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ने के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ समझौते की संभावना जताई है।

अमेरिका में मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान के केश्म द्वीप पर पांच जोरदार धमाकों की खबर सामने आई है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, सोमवार को केश्म द्वीप पर एक के बाद एक पांच विस्फोटों की आवाज सुनी गई। इसके अलावा पास के बंदर लेंगेह शहर में भी धमाकों की सूचना मिली है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये हमले अमेरिका ने किए हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने इन्हें सीमित और रक्षात्मक कार्रवाई बताया है। हालांकि, ईरान की ओर से हमलों के लिए अमेरिका या इजराइल को जिम्मेदार ठहराने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ईरान ने केश्म द्वीप के दक्षिण में दो अमेरिकी MQM-170 ड्रोन गिराने का भी दावा किया है। ये घटनाएं ऐसे समय हुई हैं, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के साथ समझौते की संभावना जता रहे हैं। केश्म द्वीप होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित है, जो दुनिया में तेल और गैस की आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है।


केश्म द्वीप पर धमाकों के बाद अमेरिकी हमले का दावा

ईरानी मीडिया के अनुसार, सोमवार को केश्म द्वीप पर लगातार पांच धमाकों की आवाज सुनाई दी। स्थानीय लोगों ने द्वीप के आसमान में दो विमान देखने की बात भी कही। पास के बंदर लेंगेह शहर में समुद्र की दिशा से विस्फोटों की आवाज आने की खबर है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी सेना ने केश्म द्वीप पर सीमित हमले किए। अधिकारियों के मुताबिक, इन कार्रवाइयों का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी सैन्य संसाधनों और व्यापारिक जहाजों के लिए खतरे को कम करना था। कुछ अधिकारियों ने दावा किया कि ईरानी बलों की ओर से अमेरिकी संसाधनों के खिलाफ सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, हमलों से हुए नुकसान और हताहतों की संख्या के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से भी तत्काल विस्तृत सार्वजनिक बयान नहीं आया था।


अमेरिका के लिए क्यों महत्वपूर्ण है केश्म द्वीप?

ईरान का केश्म द्वीप करीब 1,445 वर्ग किलोमीटर में फैला है और देश का सबसे बड़ा द्वीप माना जाता है। यह होर्मुज स्ट्रेट के प्रवेश द्वार के पास स्थित है। पहले यह द्वीप पर्यटन और मुक्त व्यापार क्षेत्र के लिए जाना जाता था, लेकिन इसकी रणनीतिक स्थिति के कारण यहां सैन्य गतिविधियां भी महत्वपूर्ण हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, द्वीप पर भूमिगत मिसाइल ठिकाने और नौसैनिक सुविधाएं मौजूद हैं। इसके अलावा सुरंगों और प्राकृतिक गुफाओं का इस्तेमाल सैन्य संसाधनों को सुरक्षित रखने के लिए किए जाने के दावे भी सामने आते रहे हैं। होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिहाज से यह इलाका बेहद संवेदनशील है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उनकी सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की ओर से समुद्री जहाजों को निशाना बनाने की क्षमता सीमित करना है। हालांकि, ईरान इन गतिविधियों को अपनी सुरक्षा से जोड़कर देखता रहा है।


होर्मुज स्ट्रेट में तनाव से तेल की सप्लाई पर असर

केश्म द्वीप की अहमियत का सबसे बड़ा कारण होर्मुज स्ट्रेट के पास उसकी स्थिति है। यह समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के रास्तों से जोड़ता है। दुनिया के कई देशों में तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। फरवरी 2026 में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। ईरान की ओर से समुद्री मार्ग पर लगाए गए प्रतिबंधों और सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। सोमवार को अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की उम्मीद बढ़ने से तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, कीमतों में सात प्रतिशत से अधिक की कमी आई। हालांकि, केश्म द्वीप पर ताजा धमाकों के बाद क्षेत्र में फिर तनाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है।


ट्रम्प ने ईरान पर दोबारा बड़े हमले से किया इनकार

केश्म द्वीप पर हमले की खबर से पहले सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ समझौते की संभावना जताई थी। पत्रकारों ने उनसे पूछा था कि क्या वह मंगलवार को होने वाले मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर फिर हमला करने पर विचार कर रहे हैं। इस सवाल पर ट्रम्प ने इनकार किया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि तेहरान के साथ बातचीत से समझौता संभव है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्टों में कहा गया है कि पिछले कुछ सप्ताह से ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाइयां की जा रही थीं। अधिकारियों के मुताबिक, इन कार्रवाइयों को सार्वजनिक नहीं किया गया, ताकि इसे बड़े सैन्य अभियान की दोबारा शुरुआत का संकेत न माना जाए। ऐसे में ट्रम्प के सार्वजनिक बयानों और सीमित सैन्य कार्रवाइयों की खबरों के बीच अंतर सामने आया है। फिलहाल दोनों देशों के बीच किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई है।


28 फरवरी से शुरू हुआ अमेरिका-इजराइल और ईरान का युद्ध

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान शुरू किए थे। अमेरिका ने अपने अभियान को 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' और इजराइल ने 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' नाम दिया था। इन अभियानों में ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों, मिसाइल ठिकानों, सैन्य अड्डों और कमांड सेंटरों को निशाना बनाया गया। हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मौत हुई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। बहरीन, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत सहित कई देशों में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गईं। युद्ध के आठ महीने बाद भी क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। केश्म द्वीप पर ताजा हमले की खबरों ने एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

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