ईरान-अमेरिका टकराव और गहरा, ट्रम्प बोले- नहीं माना तो खत्म हो जाएगा अस्तित्व; बहरीन-कुवैत पर भी हमला
- Shiv Kumar
- 28 Jun, 2026
मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर गहरा गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित सैन्य ठिकानों पर की गई। अमेरिका का दावा है कि यह हमला 'एम/टी किकु' नाम के तेल टैंकर पर हुए ईरानी ड्रोन हमले के जवाब में किया गया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक हमलों में निगरानी प्रणाली, संचार नेटवर्क, एयर डिफेंस साइट्स, ड्रोन स्टोरेज और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। वहीं रॉयटर्स के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे तेल टैंकर को नुकसान पहुंचा, हालांकि जहाज अपनी यात्रा जारी रखने में सफल रहा। इस घटनाक्रम के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और वैश्विक स्तर पर हालात पर करीबी नजर रखी जा रही है।
अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले का दावा
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी कदम उठाने का दावा किया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का कहना है कि उसने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया। हालांकि अमेरिका का कहना है कि इन हमलों में उसके किसी सैनिक के हताहत होने या सैन्य ठिकानों को बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। उधर बहरीन, कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए हमलों की निंदा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी चेतावनी दी कि यदि ईरान अपनी आक्रामक गतिविधियां नहीं रोकता तो आगे और कड़ी सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। लगातार हो रही सैन्य कार्रवाइयों से हाल ही में हुए अंतरिम युद्धविराम पर भी संकट गहरा गया है।
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा संकट
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों की चिंता भी बढ़ा दी है। अमेरिकी सेना का कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी कर रही है, जबकि ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रही तो वह क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही को लेकर और सख्त कदम उठा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केवल मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। फिलहाल दोनों देशों के बीच स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और दुनिया की नजरें आने वाले घटनाक्रम पर टिकी हैं।
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