ईरान का बड़ा बयान, होर्मुज हमारी सबसे बड़ी ताकत, बोला- पीछे हटने का सवाल नहीं, टोल पर हमारा अधिकार रहेगा

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ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपना अधिकार दोहराते हुए अमेरिका को स्पष्ट संदेश दिया है। तेहरान ने फंसी संपत्ति जारी करने की मांग रखी है, जबकि कतर में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं और क्षेत्रीय तनाव को लेकर नई हलचल देखने को मिल रही है।

ईरान ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसका नियंत्रण और अधिकार पहले की तरह कायम रहेगा। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालीबाफ ने कहा कि अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन के तहत समुद्री सेवाओं पर 60 दिनों की टोल छूट केवल अस्थायी व्यवस्था है और इससे ईरान के अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि होर्मुज ईरान के क्षेत्रीय जल का हिस्सा है और इस पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। गालीबाफ ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान पर जलडमरूमध्य के सैन्यीकरण का आरोप लगाकर विवाद खड़ा नहीं कर सकता। उनके मुताबिक युद्ध के दौरान होर्मुज स्ट्रेट ईरान के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत साबित हुआ और भविष्य में भी देश अपने इस रुख से पीछे नहीं हटेगा।

होर्मुज में बढ़ी जहाजों की आवाजाही

समुद्री निगरानी करने वाली एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही फिर तेज हुई है। सोमवार को यहां से 40 जहाज गुजरे, जिनमें से 16 ने ईरान के समुद्री मार्ग का इस्तेमाल किया। दूसरी ओर तेहरान ने अमेरिका के साथ आगे की प्रक्रिया शुरू करने से पहले विदेशों में फंसी अपनी करीब 6 अरब डॉलर की संपत्ति जारी करने की शर्त रखी है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने भी कहा कि अमेरिका के साथ हुआ समझौता देश के सर्वोच्च नेता की मंजूरी के बाद ही किया गया है। वहीं अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर अब तक की सबसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है। इस बीच राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि समझौते के क्रियान्वयन में देरी के कारण ईरान के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और वरिष्ठ नेता फिलहाल दोहा जाने से बच रहे हैं ताकि घरेलू आलोचना का सामना न करना पड़े।

जासूसी गिरफ्तारी और कतर में जारी कूटनीतिक हलचल

ईरान के सरकारी प्रसारक ने मिनाब के एक प्राथमिक विद्यालय पर कथित अमेरिकी मिसाइल हमले का वीडियो जारी किया है। ईरानी मीडिया का दावा है कि वीडियो में हमले के बाद का दृश्य दिखाई देता है और इसके जरिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया गया है। दूसरी ओर इजराइल ने एक अमेरिकी नागरिक को ईरान के लिए कथित जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह संवेदनशील ठिकानों की तस्वीरें और वीडियो ईरान से जुड़े एजेंटों तक पहुंचाता था। उधर फ्रांस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए ईरानी विपक्षी संगठन की प्रस्तावित रैली रद्द कर दी है। इसी बीच अमेरिका का प्रतिनिधिमंडल कतर पहुंच चुका है, लेकिन ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल अमेरिका के साथ किसी प्रत्यक्ष वार्ता की योजना नहीं है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल केवल पहले हुए समझौते को लागू कराने और विदेशों में फंसी संपत्तियों जैसे तकनीकी मुद्दों पर चर्चा के लिए दोहा जाएगा।

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