अमेरिका का ईरान पर लगातार चौथे दिन हमला, ट्रम्प की नई धमकी से बढ़ा तनाव, बोले- अगले हफ्ते बिजलीघर और पुल भी उड़ाएंगे

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अमेरिका ने लगातार चौथे दिन ईरान पर एयरस्ट्राइक की और समुद्री नाकेबंदी तेज कर दी। ट्रम्प ने समझौता न होने पर और बड़े हमलों की चेतावनी दी, जबकि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बीच भारत ने ईरान के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात लगातार चौथे दिन ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की, जबकि ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी भी शुरू कर दी गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कहा कि सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान बातचीत की मेज पर नहीं आता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समझौता नहीं हुआ तो अगले सप्ताह बिजलीघर, पुल और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को भी निशाना बनाया जाएगा। इस बीच होर्मुज स्ट्रेट में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।


ट्रम्प की चेतावनी, भारत ने जताया कड़ा विरोध

फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका अगले कई दिनों तक ईरान पर सैन्य दबाव बनाए रखेगा और जरूरत पड़ने पर जमीनी अभियान भी चलाया जा सकता है। दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) पर होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो व्यापारिक जहाजों पर हमला करने का आरोप है। इस घटना में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य घायल हुए। जहाज पर 20 भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद थे। घटना के बाद भारत ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के उप प्रमुख को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत से जुड़े 11 जहाज और 148 भारतीय नाविक फिलहाल फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं।


होर्मुज स्ट्रेट बना टकराव का केंद्र, दोनों देशों के दावे तेज

दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट से होती है। अमेरिका चाहता है कि इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही निर्बाध रहे, जबकि ईरान इसे अपनी सुरक्षा और संप्रभुता का मुद्दा मानता है। इसी बीच ट्रम्प ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर प्रस्तावित 20 प्रतिशत टैक्स लगाने का फैसला वापस ले लिया। दूसरी ओर, IRGC ने दावा किया कि उसने जॉर्डन के अजराक एयरबेस और बहरीन स्थित अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट बेस पर हमले किए हैं। ईरान ने अमेरिकी कमांड सेंटर, फ्यूल टैंक और सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचाने का दावा किया है, हालांकि अमेरिका और बहरीन ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।


परमाणु विवाद और क्षेत्रीय राजनीति से बढ़ा संकट

विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका-ईरान टकराव की मुख्य वजह परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण और पश्चिम एशिया में प्रभाव की लड़ाई है। अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन सीमित करे, जबकि ईरान पहले प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहा है। इस बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि सात घंटे तक चले अभियान में मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन ठिकानों और तटीय रक्षा प्रणालियों सहित कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। वहीं, अमेरिकी राजनीति में भी मतभेद उभर रहे हैं। डेमोक्रेट सांसदों के एक वर्ग ने इजराइल को दी जाने वाली सैन्य सहायता रोकने की मांग करते हुए गाजा में चल रही सैन्य कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

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