रूसी तेल खरीदना भारत को पड़ेगा भारी? 100% टैक्स लगाने की तैयारी !
रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की अमेरिकी पहल के बीच खुद अमेरिका में इसका विरोध शुरू हो गया है। एक अमेरिकी सीनेटर ने भारत पर 100% टैरिफ को “आत्मघाती कदम” बताते हुए कहा कि चीन से मुकाबले के लिए अमेरिका को भारत का साथ चाहिए।
- Babli Ansari
- 08 Aug, 2026
वॉशिंगटन। रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से भारत समेत रूसी तेल के बड़े खरीदार देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की तैयारी की जा रही है। अमेरिकी सीनेट इस दिशा में एक अहम बिल को मंजूरी भी दे चुकी है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इस फैसले पर अमेरिका के भीतर से ही विरोध की आवाज उठने लगी है। एक अमेरिकी सीनेटर ने भारत पर 100% टैरिफ लगाने के प्रस्ताव को “आत्मघाती कदम” तक बता दिया है।
US Senator ने क्यों किया विरोध?
अमेरिकी सीनेटर का तर्क है कि इस समय अमेरिका को चीन के साथ रणनीतिक और आर्थिक प्रतिस्पर्धा में भारत का सहयोग चाहिए। ऐसे में भारत पर भारी-भरकम टैरिफ लगाना अमेरिका के अपने हितों के खिलाफ जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका चीन से मुकाबले में भारत का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहा है, उसी समय भारत के सामान पर 100 फीसदी टैरिफ लगाना समझदारी नहीं होगी। उनके मुताबिक इससे दोनों देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंच सकता है और अमेरिका की रणनीतिक स्थिति कमजोर हो सकती है।
रूसी तेल बना सबसे बड़ा मुद्दा
दरअसल विवाद की जड़ भारत का रूस से तेल खरीदना है। अमेरिका का आरोप है कि रूस से तेल और ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देश अप्रत्यक्ष तौर पर रूस की अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं, जबकि रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है। इसी वजह से अमेरिकी सीनेट ने ऐसा कानून पारित किया है, जिसके तहत राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों के सामान पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार इस कदम से प्रभावित हो सकते हैं।
सीनेट से पास, लेकिन अभी अंतिम फैसला नहीं
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 100 फीसदी टैरिफ अभी भारत पर लागू नहीं हुआ है। अमेरिकी सीनेट ने बिल को मंजूरी दी है, लेकिन इसे कानून बनने के लिए आगे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से भी गुजरना होगा। रिपोर्ट के मुताबिक प्रतिनिधि सभा में इस पर आगे चर्चा होनी है। इसके बाद ही तस्वीर साफ होगी कि भारत समेत दूसरे देशों पर वास्तव में किस तरह की कार्रवाई की जाती है।
भारत के लिए क्यों अहम है मामला?
भारत की ऊर्जा जरूरतों में रूसी तेल की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो चुकी है। रूस से मिलने वाले तेल की कीमत और उपलब्धता ने भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने ऊर्जा आयात को मैनेज करने में मदद की है। ऐसे में अगर भारत पर 100 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाता है, तो इसका असर सिर्फ दोनों देशों के व्यापार पर नहीं बल्कि व्यापक आर्थिक रिश्तों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के सामने एक तरफ सस्ता और उपलब्ध रूसी तेल बनाए रखने की जरूरत है, तो दूसरी तरफ अमेरिका जैसे बड़े व्यापारिक साझेदार के साथ संबंधों को संतुलित करना भी जरूरी है।
America में ही क्यों बढ़ रही चिंता?
अमेरिकी सीनेटर के बयान से साफ है कि इस प्रस्ताव को लेकर अमेरिका में भी मतभेद हैं। कुछ सांसदों को डर है कि राष्ट्रपति को बहुत ज्यादा टैरिफ अधिकार देने से नए व्यापार युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है। विरोध करने वालों का तर्क है कि भारत पर इतना बड़ा शुल्क लगाने से अमेरिका को भी नुकसान हो सकता है, क्योंकि व्यापारिक लागत बढ़ने का असर अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। दूसरी तरफ बिल के समर्थकों का कहना है कि रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए उसके बड़े खरीदार देशों को भी निशाना बनाना जरूरी है।
अब नजर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा पर है। अगर बिल वहां भी आगे बढ़ता है तो भारत-अमेरिका संबंधों में एक नई आर्थिक चुनौती पैदा हो सकती है। लेकिन अगर विरोध बढ़ा और इसमें बदलाव किए गए, तो भारत को राहत मिल सकती है। यानी फिलहाल 100% टैरिफ की तलवार भारत पर लटक रही है, लेकिन इस तलवार को चलाने से पहले अमेरिका के भीतर ही बहस तेज हो चुकी है।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






