ट्रंप का ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक हमला, तेल कारोबार से लेकर बैंकों तक पर कार्रवाई की चेतावनी
- Shiv Kumar
- 20 Aug, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास समझौते का मौका था, लेकिन उसने इसे गंवा दिया। अब अमेरिका उस पर ऐसा आर्थिक दबाव बनाएगा, जिससे उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग किया जा सके। ट्रंप की घोषणा के मुताबिक, ईरान की मदद करने वाले देशों और संस्थाओं को भी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इसमें बैंक, कंपनियां, हवाई अड्डे और सरकारी संस्थाएं शामिल हैं। अमेरिका का निशाना खास तौर पर ईरान के तेल कारोबार और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर है। ट्रंप ने तेल की तस्करी, नकद लेनदेन, मुद्रा विनिमय, जहाजों के पंजीकरण और फर्जी कंपनियों के जरिए ईरान तक पहुंचने वाली आर्थिक मदद रोकने की बात कही है।
ट्रंप ने ईरान की सैन्य और आर्थिक स्थिति पर किया बड़ा दावा
ट्रंप ने अपनी घोषणा के दौरान दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत को पहले ही भारी नुकसान पहुंच चुका है। उनके मुताबिक, ईरान की नौसेना और वायुसेना प्रभावित हुई है और कई सैन्य कारखाने तबाह किए गए हैं। उन्होंने ईरान की मुद्रा और अर्थव्यवस्था का भी जिक्र करते हुए कहा कि देश गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। ट्रंप ने अमेरिका की नई कार्रवाई को ‘इकोनॉमिक डी-डे’ बताया। आसान भाषा में इसका मतलब ईरान पर बहुत बड़े आर्थिक दबाव की रणनीति से है। उन्होंने दूसरे देशों से भी ईरान की मदद बंद करने और अमेरिकी अभियान में साथ आने की अपील की। ट्रंप की इस घोषणा के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। वहीं, ईरान ने अमेरिकी दबाव को लेकर कड़ा रुख अपनाया है और इसे नाकाम बताया है।
ईरान ने ट्रंप के बयान को बताया बेअसर
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के वरिष्ठ अधिकारी ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद रजा नकदी ने ट्रंप के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति की सोच को बचकाना बताया और कहा कि उनके बदलते बयानों से अमेरिका की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी नई अमेरिकी आर्थिक कार्रवाई को नाकाम बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंध ईरान पर असर नहीं डाल पाएंगे। हालांकि, अगर अमेरिका दूसरे देशों, बैंकों और कंपनियों पर भी दबाव बढ़ाता है तो ईरान के लिए अंतरराष्ट्रीय कारोबार और वित्तीय लेनदेन मुश्किल हो सकते हैं। खासकर तेल कारोबार पर इसका असर पड़ने की आशंका है, क्योंकि तेल ईरान की कमाई का एक बड़ा स्रोत है।
तेल कारोबार और पैसे के रास्ते पर अमेरिका की नजर
अमेरिकी कार्रवाई का बड़ा हिस्सा ईरान के तेल कारोबार और उससे होने वाली कमाई के रास्तों को रोकने पर केंद्रित है। ईरान के लिए सिर्फ तेल बेचना ही जरूरी नहीं है, बल्कि उससे मिले पैसे को अपने देश तक पहुंचाना भी अहम है। ऐसे में अमेरिका उन कंपनियों, जहाजों, बैंकों और वित्तीय नेटवर्क पर नजर बढ़ा सकता है, जो इस पूरी प्रक्रिया में मदद करते हैं। ईरान पर पहले से लगे प्रतिबंधों के बीच तेल की बिक्री में बिचौलियों और अलग-अलग कारोबारी नेटवर्क का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आती रही है। अगर इन नेटवर्क पर कार्रवाई तेज होती है तो ईरान के लिए तेल बेचना, भुगतान हासिल करना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार जारी रखना पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अब देखना होगा कि अमेरिकी घोषणा का जमीन पर कितना असर दिखाई देता है और ईरान इसका जवाब किस तरह देता है।
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