नोएडा में स्पोर्ट्स सिटी के लिए 85 एकड़ जमीन मांगने पर ग्रामीणों ने किया विरोध, मुख्यमंत्री को पत्र लिखा

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नोएडा में एससी-01 परियोजना के लिए करीब 85 एकड़ आबादी की जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर जमीन की स्थिति की जांच की मांग की है। अब 28 अक्टूबर की प्रस्तावित नोएडा प्राधिकरण बोर्ड बैठक के फैसले पर नजर है।

नोएडा में एससी-01 प्लॉट से जुड़ी परियोजना के लिए करीब 85 एकड़ जमीन को लेकर ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है। मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि 28 अक्टूबर को प्रस्तावित नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में उनकी गैर-अधिग्रहित आबादी की जमीन को परियोजना में शामिल करने का फैसला लिया जा सकता है। ग्रामीणों का दावा है कि यह जमीन लंबे समय से आबादी के रूप में इस्तेमाल हो रही है और इसका अधिग्रहण नहीं किया गया है। उन्होंने जमीन की स्थिति और सीमाओं की जांच किए बिना किसी तरह का निर्णय लेने पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, संबंधित कंपनी अतिरिक्त जमीन को परियोजना के एकीकृत विकास के लिए जरूरी बता रही है। ऐसे में जमीन के इस्तेमाल, उसके अधिग्रहण की स्थिति और परियोजना के विस्तार को लेकर विवाद सामने आया है। अब सभी की नजर 28 अक्टूबर की प्रस्तावित बोर्ड बैठक में होने वाले फैसले पर है।


2011 में एससी-01 प्लॉट आवंटित होने के बाद बनाई गई थी सड़क

मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2011 में एससी-01 प्लॉट आवंटित होने के बाद भूखंड और आसपास के गांवों की आबादी के बीच सीमा निर्धारित करने के लिए 12 मीटर चौड़ी सड़क बनाई गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि आबादी की जमीन को अधिग्रहण से बाहर रखा गया था और तब से उसका इस्तेमाल आबादी के तौर पर होता रहा है। अब उन्हें आशंका है कि परियोजना के विस्तार के नाम पर करीब 85 एकड़ जमीन को उसमें शामिल करने का निर्णय लिया जा सकता है। ग्रामीणों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि जमीन की श्रेणी में बदलाव और विधिवत अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी किए बिना उसे किसी परियोजना में शामिल करने का फैसला नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि पहले राजस्व रिकॉर्ड और जमीन की वास्तविक स्थिति की जांच की जानी चाहिए, ताकि आबादी की मौजूदा सीमाओं और जमीन के अधिकारों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।


नक्शे में बदलाव और जमीन शामिल करने से पहले जांच की मांग

ग्रामीणों ने मांग की है कि एससी-01 के मूल आवंटित भूखंड की सीमा से बाहर नक्शे में बदलाव की अनुमति नहीं दी जाए। उन्होंने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड, जमीन के अधिग्रहण की स्थिति और आबादी की मौजूदा सीमाओं की जांच किए बिना कोई फैसला न लिया जाए। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि गैर-अधिग्रहित आबादी की जमीन को परियोजना में शामिल किया गया तो उनके जमीन संबंधी अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की जांच कराने और किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि, ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों और आशंकाओं पर प्राधिकरण का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है। ऐसे में जमीन की स्थिति और प्रस्तावित बदलावों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर ही निकाला जा सकेगा।


कंपनी बता रही अतिरिक्त जमीन जरूरी, प्राधिकरण की बोर्ड बैठक पर नजर

संबंधित कंपनी अतिरिक्त जमीन को परियोजना के एकीकृत विकास के लिए जरूरी बता रही है, जबकि ग्रामीण अपनी आबादी की जमीन पर अधिकार प्रभावित होने की आशंका जता रहे हैं। नोएडा प्राधिकरण में जमीन आवंटन के लिए सामान्य तौर पर बिड प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके तहत जमीन अधिग्रहीत करने के बाद योजना निकाली जाती है और नीलामी के माध्यम से आवंटन किया जाता है। इसी व्यवस्था के बीच अतिरिक्त जमीन को मूल आवंटन दर पर देने की मांग और ग्रामीणों के विरोध का मुद्दा सामने आया है। ग्रामीण चाहते हैं कि जमीन के अधिग्रहण और उसकी श्रेणी की स्थिति स्पष्ट होने तक कोई फैसला न लिया जाए। अब 28 अक्टूबर को प्रस्तावित बोर्ड बैठक में इस मामले पर क्या निर्णय होता है, इस पर नजर रहेगी। बैठक में होने वाला फैसला परियोजना के विस्तार और ग्रामीणों की आपत्तियों, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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