नोएडा में बनेगी AI सिटी और बिजनेस पार्क, प्राधिकरण ने PPP मॉडल पर प्रोजेक्ट को दी सैद्धांतिक मंजूरी
- Shiv Kumar
- 29 Oct, 2026
नोएडा में एआई सिटी और बिजनेस पार्क विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। नोएडा प्राधिकरण की 224वीं बोर्ड बैठक में यूपी प्राइवेट बिजनेस पार्क डेवलपमेंट स्कीम-2025 को अपनाने और मास्टर डेवलपर के चयन के लिए आरएफपी जारी करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। इस प्रोजेक्ट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इसके लिए निजी कंपनी का चयन होगा, लेकिन जमीन का मालिकाना हक नोएडा प्राधिकरण के पास ही रहेगा।
AI, IT और स्टार्टअप कंपनियों को मिलेगी जगह
प्रोजेक्ट के तहत जमीन 45 साल की लीज पर दी जाएगी। जरूरत के अनुसार इसे अगले 45 साल के लिए बढ़ाया भी जा सकेगा। प्रस्तावित बिजनेस पार्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), आईटी, आईटी से जुड़ी सेवाओं, रिसर्च सेंटर, स्टार्टअप और नई तकनीक पर काम करने वाली कंपनियों के लिए जगह विकसित की जाएगी। इसके साथ ही युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देने और उनके कौशल विकास के लिए केंद्र भी बनाए जाएंगे। योजना का उद्देश्य तकनीक आधारित कंपनियों को एक ही परिसर में सुविधाएं उपलब्ध कराना और रोजगार व प्रशिक्षण के अवसर बढ़ाना है।
बिजनेस पार्क में 50 प्रतिशत जगह IT और ज्ञान आधारित सेवाओं के लिए
योजना के अनुसार, बिजनेस पार्क में विकसित होने वाले कुल क्षेत्र का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा आईटी और ज्ञान आधारित सेवाओं के लिए आरक्षित रखना होगा। वहीं, फूड कोर्ट, रिटेल और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अधिकतम 10 प्रतिशत जगह निर्धारित होगी। शेष क्षेत्र में प्रशिक्षण केंद्र, रिसर्च और तकनीक से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी। इस व्यवस्था के जरिए बिजनेस पार्क में तकनीकी और ज्ञान आधारित गतिविधियों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, परिसर में काम करने वाले लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सीमित क्षेत्र में खानपान और अन्य व्यावसायिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
पांच चरणों में पूरा होगा निर्माण, 90 महीने की समयसीमा
प्रोजेक्ट का निर्माण पांच चरणों में किया जाएगा। पहले चरण को 24 महीने में पूरा करना होगा। दूसरे चरण तक कुल प्रस्तावित निर्माण का 40 प्रतिशत हिस्सा तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद तीसरे और चौथे चरण में निर्माण क्रमशः 60 और 80 प्रतिशत तक पहुंचाया जाएगा। पांचवें चरण में पूरा प्रोजेक्ट विकसित करना होगा। अगले चरण में जाने के लिए पिछले चरण की कम से कम 60 प्रतिशत जगह पर कब्जा, लीज या इस्तेमाल शुरू होना जरूरी होगा। हालांकि, मांग कम रहने की स्थिति में भी अगला चरण शुरू करने में तय सीमा से अधिक देरी नहीं की जा सकेगी। पूरे प्रोजेक्ट को अधिकतम 90 महीने यानी साढ़े सात साल में पूरा करना होगा। निर्माण, वित्त और संचालन की जिम्मेदारी चयनित निजी कंपनी की होगी। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद प्रोजेक्ट प्राधिकरण को सौंपना होगा।
ई-बिडिंग से चुना जाएगा मास्टर डेवलपर
मास्टर डेवलपर का चयन ई-बिडिंग के जरिए किया जाएगा। तकनीकी मूल्यांकन के लिए कुल 100 अंक निर्धारित किए गए हैं। इसमें कम से कम 75 अंक हासिल करने वाली कंपनियां ही वित्तीय बोली के चरण में पहुंच सकेंगी। वित्तीय मूल्यांकन में जमीन के लिए दी जाने वाली शुरुआती प्रीमियम राशि और कुल किराये की आय में प्राधिकरण की हिस्सेदारी को बराबर महत्व दिया जाएगा। अब नोएडा प्राधिकरण कंपनी की पात्रता, वित्तीय शर्तों और बोली प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी के साथ आरएफपी जारी करने की तैयारी करेगा। इसके बाद तय प्रक्रिया के तहत मास्टर डेवलपर का चयन किया जाएगा और प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जाएगा।
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