देश में 7 राज्यों के राज्यपाल बदले, दिल्ली-लद्दाख के LG बदले, बंगाल के राज्यपाल ने दिया इस्तीफा, ममता बनर्जी ने केंद्र के फैसले पर उठाए सवाल
- Shiv Kumar
- 06 Mar, 2026
देश में राज्यपाल और उपराज्यपाल पदों पर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को 7 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में नई नियुक्तियों को मंजूरी दी। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनकी जगह तमिलनाडु के राज्यपाल रहे आर. एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। इसके अलावा लद्दाख के उपराज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने भी पद छोड़ दिया है। उन्हें अब हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है। वहीं दिल्ली के उपराज्यपाल रहे विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों के साथ कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशासनिक बदलाव लागू हो गए हैं।
ममता बनर्जी ने जताई नाराजगी
पश्चिम बंगाल में राज्यपाल के बदलाव को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से सूचना दी गई कि आरएन रवि को बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया जा रहा है। ममता बनर्जी ने कहा कि इस फैसले से पहले उनसे कोई राय नहीं ली गई। उन्होंने इसे केंद्र सरकार का एकतरफा निर्णय बताया। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इस नियुक्ति को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
बोस और ममता सरकार के बीच रहे कई विवाद
सीवी आनंद बोस ने 23 नवंबर 2022 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला था। उनके कार्यकाल के दौरान कई बार राज्य सरकार और राजभवन के बीच टकराव की स्थिति बनी रही। खासतौर पर विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर नियुक्ति, विधेयकों को मंजूरी देने में देरी और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर मतभेद सामने आए। राज्य सरकार ने आरोप लगाया था कि राज्यपाल बिना सलाह के विश्वविद्यालयों में नियुक्तियां कर रहे हैं। वहीं बोस का कहना था कि कानून के तहत उन्हें यह अधिकार प्राप्त है। कई मामलों में यह विवाद अदालत तक पहुंच गया था।
अन्य मुद्दों पर भी बढ़ा तनाव
राज्यपाल के जिलों के दौरे और जनता से सीधे संवाद को लेकर भी राज्य सरकार ने आपत्ति जताई थी। सरकार का कहना था कि यह समानांतर प्रशासन जैसा है, जबकि राज्यपाल ने इसे जनता से जुड़ने का संवैधानिक दायित्व बताया। इसके अलावा मनरेगा और केंद्रीय योजनाओं में कथित अनियमितताओं पर राज्यपाल की टिप्पणियों को लेकर भी राजनीतिक विवाद हुआ। 2024 में लोक भवन से जुड़े यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई थी। इन सभी घटनाओं के चलते राज्यपाल और राज्य सरकार के संबंधों में लगातार तनाव बना रहा।
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