दिल्ली साइबर सेल ने पकड़ा म्यूल अकाउंट गिरोह, देशभर की ठगी में बैंक खातों की सप्लाई का खुलासा
- Babli Ansari
- 16 Jun, 2026
नई दिल्ली। दिल्ली साइबर सेल ने एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है जो म्यूल अकाउंट के जरिए देशभर के साइबर ठगों को बैंक खातों की सप्लाई कर रहा था। जांच एजेंसियों के मुताबिक यह गिरोह ग्रामीण और कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के लोगों के नाम पर खाते खुलवाता था और फिर उन्हें ऑनलाइन फ्रॉड की रकम इधर से उधर करने के लिए इस्तेमाल करता था। पुलिस की शुरुआती पड़ताल में सामने आया है कि यह मॉडल अब बड़े साइबर अपराधों की रीढ़ बन चुका है, क्योंकि असली ठग सामने आए बिना पैसा खिसकाने का रास्ता यहीं से मिलता है। गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुई हैं और कई राज्यों तक कड़ियाँ जुड़ रही हैं।
गिरोह कैसे काम कर रहा था
पुलिस सूत्रों के अनुसार यह गिरोह सीधे ठगी नहीं करता था, बल्कि साइबर अपराधियों को खातों की फीडिंग करता था। ग्रामीण इलाकों में बैंक खाता खुलवाने के लिए लोगों से पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज लिए जाते थे, कई बार मामूली कमीशन या लालच देकर खाते उनके नाम पर खुलवाए जाते थे। बाद में एटीएम, पासबुक और नेट बैंकिंग से जुड़ी जानकारी गिरोह के पास चली जाती थी। यही खाते डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, लोन फ्रॉड और ओटीपी आधारित ठगी में रकम घुमाने के काम आते थे। हाल के मामलों में ऐसे ही म्यूल अकाउंट गिरोहों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हुआ है और पुलिस ने अलग-अलग शहरों में इसी तरह के नेटवर्क पर शिकंजा कसा है।
साइबर ठगी की बड़ी चेन में नया लिंक
इस कार्रवाई का महत्व सिर्फ एक गिरोह की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों में साइबर सेल लगातार ऐसे नेटवर्क तोड़ रही है, जिनमें बैंक खाते, फर्जी पहचान और मिडिलमैन की एक लंबी चेन काम करती है। कानपुर में हाल ही में 225 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन वाले म्यूल अकाउंट नेटवर्क का खुलासा हुआ था, जिसमें 450 से ज्यादा खातों की जानकारी मिली थी। दूसरी ओर, मेरठ और पश्चिमी यूपी में भी फर्जी जनसेवा केंद्रों और बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम पास कराने वाले गिरोहों पर कार्रवाई हुई है। दिल्ली की यह कार्रवाई उसी बड़ी तसवीर का हिस्सा मानी जा रही है, जहां ठग अब सीधे किसी एक शहर तक सीमित नहीं रहे।
आगे की जांच और लोगों के लिए चेतावनी
जांच अधिकारियों का कहना है कि अब फोकस उन लोगों पर भी है जिनके नाम पर खाते खुले, जिन एजेंटों ने दस्तावेज जुटाए और जिन गिरोहों ने इन खातों को अलग-अलग राज्यों में बेचा। बैंकिंग चैनल, मोबाइल नंबर, यूपीआई आईडी और ट्रांजैक्शन पैटर्न की फॉरेंसिक जांच से पूरा नेटवर्क खंगाला जा रहा है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी हालत में अपने दस्तावेज या बैंक खाता दूसरे के इस्तेमाल के लिए न दें, क्योंकि एक बार खाता साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल हो गया तो उसका कानूनी बोझ असली खाताधारक पर भी आ सकता है। जांच एजेंसियां अब यह भी देख रही हैं कि इस गिरोह के तार किन बड़े साइबर सिंडिकेट से जुड़े हैं।
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