छत्तीसगढ़ में बिजली दरें बढ़ने पर कांग्रेस का राज्यव्यापी आंदोलन, सभी जिलों में दफ्तर घेराव की तैयारी

top-news
छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में औसतन 6.23 प्रतिशत बढ़ोतरी के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर जनता पर बोझ डालने का आरोप लगाते हुए राज्यभर में आंदोलन और जिला स्तर पर घेराव की घोषणा की है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में बढ़ोतरी के फैसले ने सियासत गरमा दी है। राज्य विद्युत नियामक आयोग की मंजूरी के बाद 1 जुलाई से नई दरें लागू होंगी और इसी के साथ कांग्रेस ने सरकार पर सीधा हमला बोल दिया है। पार्टी का कहना है कि भाजपा सरकार ने पहले महंगाई का बोझ बढ़ाया और अब बिजली बिल में भी जनता को झटका दे दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मंगलवार को ऐलान किया कि पार्टी इस फैसले के खिलाफ राज्यभर में आंदोलन छेड़ेगी और हर जिले में बिजली दफ्तरों का घेराव किया जाएगा। 

बढ़ोतरी का फैसला और कांग्रेस का आरोप

मिली जानकारी के मुताबिक राज्य विद्युत नियामक आयोग ने सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए औसतन 6.23 प्रतिशत बिजली दर वृद्धि को मंजूरी दी है। नए टैरिफ के तहत घरेलू उपभोक्ताओं पर 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट, गैर-घरेलू उपभोक्ताओं पर 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट और कृषि पंप कनेक्शन पर 40 पैसे प्रति यूनिट तक का भार बढ़ेगा। आयोग ने महिलाओं के स्वयं-सहायता समूहों, अस्पतालों और आदिवासी क्षेत्रों के लिए कुछ रियायतें बरकरार रखी हैं, लेकिन विपक्ष का कहना है कि राहत के नाम पर यह बढ़ोतरी आम उपभोक्ता की जेब पर सीधा वार है। दीपक बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा के शासन में बिजली के दाम लगातार बढ़े हैं। 

कांग्रेस ने इस मुद्दे को महज आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक लड़ाई का रूप देना शुरू कर दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर और नई दरों के जरिए सरकार जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। आंदोलन की रूपरेखा के तहत जिला मुख्यालयों पर बिजली विभाग के दफ्तरों का घेराव किया जाएगा और स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन भी होंगे। सूत्रों के अनुसार संगठन ने कार्यकर्ताओं को जुटाने की तैयारी शुरू कर दी है, ताकि बढ़ी हुई दरों के खिलाफ विरोध को गांवों और कस्बों तक ले जाया जा सके। कांग्रेस इसे आने वाले दिनों में बड़ा जनमुद्दा बनाने के मूड में है। 

पिछली दरों से तुलना और बढ़ती नाराजगी

पार्टी का तर्क है कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान बिजली दरों में नाममात्र की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि उपभोक्ताओं को 400 यूनिट तक 'बिजली बिल हाफ' योजना का फायदा मिलता रहा। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मौजूदा सरकार ने उस राहत को भी अप्रभावी कर दिया है। दूसरी ओर, सामने आई जानकारी के मुताबिक बिजली कंपनियों ने इससे कहीं ज्यादा, करीब 24 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा था, लेकिन नियामक आयोग ने उसे स्वीकार नहीं किया। यही वजह है कि सरकार के भीतर यह दावा किया जा रहा है कि बढ़ोतरी सीमित रखी गई है। फिर भी आम परिवारों में बिल बढ़ने की चिंता साफ दिख रही है। 

राज्य के उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि जुलाई की पहली तारीख के बाद बिल कितना बदलेगा। घरेलू स्लैब में 100 यूनिट की खपत पर हर महीने करीब 15 रुपये तक अतिरिक्त बोझ पड़ने की चर्चा ने लोगों की नाराजगी और बढ़ा दी है। कृषि पंपों, छोटे दुकानदारों और मध्यमवर्गीय परिवारों में भी इसे लेकर चिंता है। कांग्रेस इसी नाराजगी को सड़क पर लाने की रणनीति में है, जबकि सत्ता पक्ष के सामने अब यह समझाने की चुनौती है कि बढ़ोतरी को नियंत्रित और न्यायसंगत क्यों माना जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *