नेपाल में भारतीय युवक प्रिंस यादव की संदिग्ध मौत, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद भी बढ़ा रहस्य

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नेपाल के विराटनगर स्थित एक होटल में भारतीय युवक प्रिंस यादव की संदिग्ध मौत ने नया मोड़ ले लिया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद भी नेपाल पुलिस अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है और परिवार लगातार सवाल उठा रहा है।

नई दिल्ली। नेपाल के विराटनगर में एक होटल के कमरे से मिली भारतीय युवक प्रिंस यादव की संदिग्ध मौत अब दो देशों की पुलिस जांच का मुद्दा बन गई है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आने के बावजूद मौत की वजह पर साफ तस्वीर नहीं बन पाई है और जांच एजेंसियां हर एंगल से मामले को खंगाल रही हैं। परिजनों का आरोप है कि मौत को सामान्य बताकर फाइल बंद करने की कोशिश हो रही है, जबकि नेपाल पुलिस का कहना है कि अभी कई कड़ियां जुड़नी बाकी हैं। इस पूरे मामले ने बिहार और यूपी के उन परिवारों में भी चिंता बढ़ा दी है, जिनके बच्चे पढ़ाई और काम के सिलसिले में नेपाल जाते हैं।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद भी नहीं मिला जवाब

जानकारी के मुताबिक प्रिंस यादव की मौत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि होटल के कमरे में आखिर क्या हुआ। शुरुआती स्तर पर जिस तरह के संकेत मिले, उससे मामला हादसा, आत्महत्या या किसी साजिश, तीनों एंगल पर जा रहा था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद भी नेपाल पुलिस ने कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है, क्योंकि शरीर पर मिले संकेत और घटनास्थल की परिस्थितियां एक-दूसरे से पूरी तरह मेल नहीं खा रही हैं। सूत्रों के अनुसार पुलिस को कमरे से मिले कुछ सामान, मोबाइल डाटा और कॉल रिकॉर्ड से अहम सुराग मिलने की उम्मीद है। परिवार का कहना है कि प्रिंस हाल में सामान्य बातचीत कर रहे थे और किसी बड़े तनाव में नहीं दिख रहे थे।

होटल रूम, मोबाइल और साथियों के बयान जांच के केंद्र में

मामले की जांच अब होटल के सीसीटीवी फुटेज, चेक-इन रजिस्टर और प्रिंस के साथ ठहरे या संपर्क में रहे लोगों के बयानों पर टिक गई है। बताया जा रहा है कि पुलिस यह भी देख रही है कि घटना से पहले कमरे में कौन-कौन आया था और प्रिंस की आखिरी गतिविधि क्या थी। मोबाइल फोन को जांच का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि उसी से बातचीत, लोकेशन और आखिरी घंटों की गतिविधियों का पता चल सकता है। नेपाल और भारतीय एजेंसियों के बीच भी सूचनाओं का आदान-प्रदान शुरू हो चुका है। परिजनों ने स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है और कहा है कि जब तक हर सवाल का जवाब नहीं मिलेगा, तब तक वे चुप नहीं बैठेंगे।

परिवार के आरोप और आगे की कार्रवाई

परिजनों ने इस पूरे प्रकरण में लापरवाही और दबाव की आशंका जताई है। उनका कहना है कि मौत के बाद जिस तेजी से घटनाक्रम आगे बढ़ा, उससे कई अहम सबूतों के छूट जाने का खतरा पैदा हो गया। परिवार अब भारतीय दूतावास और बिहार प्रशासन से भी हस्तक्षेप की उम्मीद लगाए बैठा है। इधर, जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट, मोबाइल डेटा और गवाहों के बयान आने के बाद ही तस्वीर साफ होगी। अभी तक कोई एक कारण तय नहीं हुआ है, इसलिए पुलिस हर संभावना को खुला रखकर जांच कर रही है। इस केस ने सोशल मीडिया पर भी जोर पकड़ा है और लोग नेपाली प्रशासन से पारदर्शी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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