दिल्ली में बिजली बिल पर फिर बढ़ा बोझ, DERC ने फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने की मंजूरी दी
- Babli Ansari
- 19 Jun, 2026
नई दिल्ली। राजधानी में बिजली उपभोक्ताओं को एक और झटका लगा है। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग यानी DERC ने बिजली कंपनियों को फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज, यानी FPPAS, बढ़ाकर वसूलने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद दिल्ली के कई इलाकों में बिजली बिल पहले से ज्यादा आएंगे। जानकारी के मुताबिक यह बढ़ोतरी सभी श्रेणियों पर एक जैसी नहीं होगी, लेकिन घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं की जेब पर इसका सीधा असर पड़ेगा। छोटे उपभोक्ताओं को राहत देने की बात भी सामने आई है, मगर बड़े स्लैब में खपत करने वालों के लिए मासिक खर्च ऊपर जाएगा।
किस पर कितना असर, कंपनियों को मिली नई छूट
सूत्रों के अनुसार DERC ने बिजली वितरण कंपनियों को FPPAS के तहत अधिक वसूली की अनुमति दी है, जिससे कंपनियां अब सरचार्ज को संशोधित दरों पर बिल में जोड़ सकेंगी। रिपोर्टों में बताया गया है कि कुछ उपभोक्ता वर्गों पर यह बढ़ोतरी लगभग 16 से 17 फीसदी तक पहुंच सकती है, जबकि छोटे ग्राहकों को इस झटके से आंशिक राहत मिल सकती है। टाटा पावर से जुड़े उपभोक्ताओं पर असर तुलनात्मक रूप से कम रहने की बात कही जा रही है, लेकिन बीएसईएस के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बिल में बढ़ोतरी ज्यादा महसूस हो सकती है। बिजली कंपनियों का तर्क है कि ईंधन और खरीद लागत में उतार-चढ़ाव के बाद यह समायोजन जरूरी है, ताकि वितरण व्यवस्था पर दबाव कम रखा जा सके।
दिल्ली की बिजली व्यवस्था पहले से ही राजनीतिक बहस का हिस्सा रही है, और अब इस फैसले ने आम उपभोक्ता की चिंता और बढ़ा दी है। बीते महीनों में महंगाई, किराया, खाने-पीने की लागत और घरेलू खर्च बढ़ने से लोग पहले ही दबाव में हैं। ऐसे में बिजली बिल में अतिरिक्त सरचार्ज परिवारों के बजट को और तंग करेगा। कई इलाकों में उपभोक्ता संगठनों ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं कि जब सरकारें राहत और सस्ती बिजली के दावे करती हैं, तब इस तरह के चार्ज का बोझ आखिर किसके हिस्से में आता है। अभी तक आयोग की तरफ से इस बढ़ोतरी पर विस्तृत सार्वजनिक सफाई नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले बिलिंग साइकिल में इसका असर साफ दिखेगा।
रूफटॉप सोलर की ओर झुकाव, फिर भी राहत सीमित
उधर, दिल्ली और देश के कई हिस्सों में लोग लंबे समय से बिजली बिल कम करने के लिए रूफटॉप सोलर की तरफ देख रहे हैं। सीईईडब्ल्यू के हालिया अध्ययन के मुताबिक, जिन परिवारों ने छत पर सोलर सिस्टम लगाया, उनके मासिक बिजली बिल में औसतन 71 फीसदी तक कमी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा बताता है कि अपनी बिजली खुद बनाने का मॉडल अब केवल पर्यावरण की जरूरत नहीं, बल्कि घरों के बजट का भी अहम उपाय बनता जा रहा है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि सोलर अपनाने की सबसे बड़ी वजह लोगों के लिए बिल में कमी ही रही। दिल्ली जैसे शहर में, जहां खपत ज्यादा है और गर्मी के महीनों में एसी-फैन का लोड बढ़ जाता है, सोलर अब व्यवहारिक विकल्प बनकर उभर रहा है।
लेकिन जमीन पर तस्वीर इतनी आसान नहीं है। हर घर के लिए छत, निवेश और इंस्टॉलेशन की सुविधा एक जैसी नहीं होती, इसलिए बड़ी आबादी अभी भी डिस्कॉम की दरों पर ही निर्भर है। ऐसे में FPPAS बढ़ने का मतलब है कि जिन लोगों के पास वैकल्पिक ऊर्जा का सहारा नहीं है, उनके लिए बिल का बोझ तुरंत बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर राजधानी को लंबे समय में राहत देनी है तो केवल सरचार्ज में कटौती से काम नहीं चलेगा, बल्कि सस्ती और स्थिर बिजली आपूर्ति, बेहतर ग्रिड मैनेजमेंट और सोलर जैसी साफ ऊर्जा के विस्तार पर एक साथ काम करना होगा। फिलहाल उपभोक्ताओं की निगाह अगले बिल पर टिक गई है, क्योंकि असर अब कागज पर नहीं, सीधे जेब में दिखेगा।
जनता पर असर और आगे की तस्वीर
बिजली बिल में यह बढ़ोतरी ऐसे समय आई है जब दिल्ली की आम आबादी पहले से ही रोजमर्रा के खर्चों से जूझ रही है। गर्मियों में खपत बढ़ने से बिल वैसे ही ऊपर जाते हैं, ऊपर से नया सरचार्ज परिवारों की मासिक गणना बिगाड़ सकता है। खासकर वे मध्यमवर्गीय घर, जहां खपत थोड़ी ज्यादा है लेकिन आमदनी सीमित, इस फैसले से सबसे ज्यादा असहज होंगे। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ सकता है, जिसका असर आगे चलकर सेवाओं और बाजार कीमतों पर पड़ना असंभव नहीं है। राजधानी में बिजली दरों को लेकर होने वाली यह ताजा हलचल राजनीतिक तौर पर भी संवेदनशील मानी जा रही है, क्योंकि हर सरकार उपभोक्ता हितों की बात करती रही है।
अब निगाह इस पर है कि आयोग और बिजली कंपनियां आने वाले दिनों में किस तरह की स्पष्टता देती हैं। अगर सरचार्ज के पीछे वास्तविक लागत बढ़ोतरी का तर्क मजबूत माना जाता है, तो उपभोक्ताओं के लिए तुरंत राहत की गुंजाइश कम दिखती है। दूसरी तरफ, अगर यह बढ़ोतरी स्थायी रूप लेने लगी तो दिल्ली में सस्ते बिजली मॉडल पर फिर सवाल उठेंगे। फिलहाल इतना साफ है कि राजधानी के लाखों उपभोक्ताओं के लिए बिजली अब पहले से ज्यादा महंगी हो गई है और इसका असर अगले बिल से महसूस होना तय माना जा रहा है।
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