राम मंदिर दान-पेटी चोरी मामले में SIT की जांच तेज, लखनऊ लौटकर रिपोर्ट सौंपने की तैयारी

top-news
अयोध्या के राम मंदिर में दान-पेटियों से कथित चोरी की जांच ने रफ्तार पकड़ ली है। SIT आज लखनऊ लौटकर शुरुआती रिपोर्ट देने की तैयारी में है, जबकि सात गिनती कर्मियों से पूछताछ जारी है।

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान-पेटियों से कथित चोरी के मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने जांच का दायरा और कड़ा कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक टीम आज लखनऊ लौटकर शुरुआती चरण की रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप सकती है। इस बीच दान की गिनती और जमा प्रक्रिया से जुड़े सात कर्मियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। मामला मंदिर की दान व्यवस्था और उसके भीतर चल रही निगरानी प्रणाली पर सीधे सवाल खड़े कर रहा है। जांच में सीसीटीवी फुटेज, बैंक रिकॉर्ड और दान के प्रवाह से जुड़े दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।

दान से बैंक तक पूरा रास्ता खंगाल रही SIT

जांच एजेंसी ने अब तक यह समझने की कोशिश की है कि श्रद्धालुओं से मिलने वाली नकदी, सिक्के और अन्य सामग्री किस तरह दान-पेटियों से निकलकर काउंटिंग सेंटर और फिर बैंक तक पहुंचती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक दान पेटियां तय प्रक्रिया के तहत चार अधिकृत लोगों की मौजूदगी में खोली जाती हैं, जिनमें ट्रस्ट प्रतिनिधि और बैंक अधिकारी शामिल होते हैं। इसके बाद नकदी को सील किए गए कंटेनरों में काउंटिंग सेंटर भेजा जाता है, जहां नोटों और सिक्कों की अलग-अलग गिनती होती है। एसआईटी इसी पूरी श्रृंखला में किसी चूक, मिलीभगत या हेरफेर की संभावना तलाश रही है।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक एसआईटी अब तक 24 लोगों से पूछताछ कर चुकी है और जांच के पहले चरण की शुरुआती रिपोर्ट आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच सकती है। वहीं एनडीटीवी के अनुसार इस मामले में राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से भी दोबारा पूछताछ की जा रही है, जबकि जांच का दायरा दान की रकम के साथ सोने और जमीन से जुड़े पहलुओं तक बढ़ाया गया है। इससे साफ है कि टीम महज नकदी की गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि पूरे फंड मैनेजमेंट सिस्टम की परतें खोल रही है।

पुरानी व्यवस्था और नई सख्ती के बीच बढ़ा दबाव

मंदिर प्रशासन की दान व्यवस्था लंबे समय से तय SOP पर चल रही थी, लेकिन इस कथित चोरी ने उसी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक रोजाना दान की रकम आमतौर पर 8 से 13 लाख रुपये रहती है, जबकि कुछ दिनों में यह 50 से 60 लाख रुपये तक भी पहुंच जाती है। इसी वजह से दान-पेटियों की गिनती, ताले, सील और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया बेहद संवेदनशील मानी जाती है। जांचकर्ताओं को शक है कि अगर किसी स्तर पर निगरानी कमजोर हुई तो उससे बड़ी रकम गायब की जा सकती है।

स्थानीय प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट पर अब यह दबाव बढ़ गया है कि वे पूरी व्यवस्था को और पारदर्शी बनाएं। सूत्रों के अनुसार पूछताछ में काउंटिंग कर्मचारियों की ड्यूटी, शिफ्ट, ब्रेक और उनकी आवाजाही तक की पड़ताल की जा रही है। गिनती करने वालों की भूमिका इसलिए भी अहम है, क्योंकि दान की सीलिंग से लेकर बैंक में जमा होने तक वही सबसे आखिरी कड़ी होते हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ यह मामला केवल चोरी का नहीं, बल्कि मंदिर प्रशासन की आंतरिक सुरक्षा और नियंत्रण प्रणाली की परीक्षा बन गया है।

अगले कदम पर टिकी निगाहें

अब सबकी नजर SIT की लखनऊ में दी जाने वाली शुरुआती रिपोर्ट पर है। इसी रिपोर्ट से यह साफ हो सकता है कि जांच किस दिशा में जा रही है और किन लोगों की जिम्मेदारी तय मानी जा रही है। अभी तक जो संकेत सामने आए हैं, उनसे लगता है कि टीम कुछ नामों, कुछ दस्तावेजों और कुछ लेन-देन की कड़ियों पर फोकस कर रही है। पूछताछ की लंबी सूची और रिकॉर्ड की गहन जांच से यह भी संकेत मिलता है कि मामला सामान्य आंतरिक गड़बड़ी से आगे जा सकता है।

अयोध्या में यह प्रकरण धार्मिक आस्था से जुड़े एक बड़े संस्थान की कार्यप्रणाली पर सीधा असर डाल रहा है। श्रद्धालुओं का दान ही मंदिर की व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, इसलिए उसमें किसी भी तरह की हेराफेरी को लेकर सख्ती स्वाभाविक है। जांच के अगले चरण में और लोगों के बयान दर्ज हो सकते हैं, जबकि कुछ संदिग्ध दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच भी कराई जा सकती है। फिलहाल पूरा मामला जांच एजेंसियों की निगरानी में है और मंदिर परिसर के भीतर दान प्रबंधन से जुड़े हर कदम पर नजर रखी जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *