उत्तराखंड-गुजरात के बाद अब MP में UCC लागू, विधानसभा में ऐतिहासिक फैसला
मध्य प्रदेश विधानसभा ने (UCC) बिल को पारित कर दिया। प्रदेश अब उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद इस कानून पारित करने वाला चौथा राज्य है। नए कानून के तहत सभी धर्मों के विवाह का पंजीकरण अनिवार्य होगा।
- Babli Ansari
- 21 Jul, 2026
मध्य प्रदेश विधानसभा ने (UCC) विधेयक को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद UCC कानून पारित करने वाला देश का चौथा राज्य बन गया। विधानसभा में विधेयक पेश होने के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे सामाजिक समानता और महिलाओं के अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम बताया, जबकि कांग्रेस ने कई प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए इसका विरोध किया। सरकार का कहना है कि यह कानून सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक व्यवस्था सुनिश्चित करेगा और अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान व्यवस्था लागू होगी।
शादी, तलाक, विरासत और लिव-इन से जुड़े नियमों में होंगे बदलाव
नए UCC कानून के तहत विवाह, तलाक, गोद लेने, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े मामलों में समान नियम लागू किए जाएंगे। विधेयक में बहुविवाह पर रोक, विवाह का अनिवार्य पंजीकरण और लिव-इन रिलेशनशिप का निर्धारित समय के भीतर रजिस्ट्रेशन जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। महिलाओं और पुरुषों को उत्तराधिकार में समान अधिकार देने का भी प्रावधान रखा गया है। हालांकि अनुसूचित जनजातियों (ST) को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। सरकार का दावा है कि इससे महिलाओं को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और पारिवारिक विवादों के समाधान में एकरूपता आएगी।
सदन में विपक्ष का विरोध, सरकार ने बताया ऐतिहासिक कदम
विधानसभा में बिल पेश होने के दौरान कांग्रेस ने इसे लेकर कई सवाल उठाए और कहा कि इतने महत्वपूर्ण कानून पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए थी। विपक्ष ने आरोप लगाया कि कुछ समुदायों की चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह कानून किसी धर्म के खिलाफ नहीं बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार देने की दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने कहा कि कानून का उद्देश्य समाज में समानता, पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करना है। सदन में लंबी बहस के बाद आखिरकार बहुमत से विधेयक पारित कर दिया गया।
देश में UCC की बहस को मिली नई रफ्तार
मध्य प्रदेश में UCC पारित होने के बाद देशभर में समान नागरिक संहिता को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। उत्तराखंड सबसे पहले इस कानून को लागू करने वाला राज्य बना था, जिसके बाद गुजरात और असम ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाए। अब मध्य प्रदेश के इस फैसले को राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में अन्य राज्यों में भी इस विषय पर चर्चा तेज हो सकती है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि कानून के लागू होने के बाद इसके नियम और प्रक्रियाएं किस तरह जमीन पर लागू की जाती हैं।
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