1900 सरकारी स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं! MP हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। 1900 सरकारी स्कूलों में कोई शिक्षक नहीं पाया गया। CAG रिपोर्ट पर जवाब मांगा।
- Babli Ansari
- 21 Jul, 2026
मध्य प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक जनहित याचिका (PIL) में दावा किया गया कि प्रदेश के करीब 1,895 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक तैनात नहीं है। इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि जब इन स्कूलों में शिक्षक ही नहीं हैं तो बच्चों की पढ़ाई कैसे हो रही है और शिक्षा का अधिकार कानून का पालन किस प्रकार किया जा रहा है। हाईकोर्ट की इस सख्ती के बाद राज्य की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है।
याचिका में शिक्षा व्यवस्था की गंभीर तस्वीर पेश
याचिका में कहा गया है कि हजारों छात्र ऐसे स्कूलों में पढ़ने के लिए मजबूर हैं, जहां नियमित शिक्षक मौजूद नहीं हैं। इतना ही नहीं, याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि दूसरी ओर करीब 435 ऐसे सरकारी स्कूल भी हैं जहां छात्रों की संख्या शून्य है, लेकिन वहां शिक्षक तैनात हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि शिक्षकों की तैनाती और संसाधनों के प्रबंधन में गंभीर असंतुलन है। याचिका में सरकार से मांग की गई है कि शिक्षक विहीन स्कूलों में जल्द नियुक्तियां की जाएं और शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित किया जाए।
सरकार से मांगा विस्तृत जवाब
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि वे इस पूरे मामले पर विस्तृत जवाब दाखिल करें। अदालत जानना चाहती है कि शिक्षक विहीन स्कूलों की वास्तविक संख्या क्या है, वहां छात्रों की स्थिति क्या है और सरकार इस समस्या के समाधान के लिए अब तक क्या कदम उठा चुकी है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ तो इस मामले में आगे और कड़े निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं। फिलहाल सरकार की ओर से विस्तृत जवाब का इंतजार किया जा रहा है।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
इस मामले ने मध्य प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बिना शिक्षकों के स्कूल चलना बच्चों के भविष्य के साथ बड़ा समझौता है। यदि याचिका में किए गए दावे सही पाए जाते हैं, तो सरकार को न केवल रिक्त पदों पर जल्द भर्ती करनी होगी बल्कि शिक्षकों की तैनाती की पूरी व्यवस्था की भी समीक्षा करनी पड़ेगी। अब सभी की नजर हाईकोर्ट में सरकार की ओर से दाखिल किए जाने वाले जवाब और आगे की सुनवाई पर टिकी हुई है।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






