संसद परिसर में धरने पर बैठे चंद्रशेखर आज़ाद, टॉयलेट इस्तेमाल करने से रोकने का लगाया आरोप

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संसद में विरोध के बीच चंद्रशेखर आज़ाद का बड़ा दावा, टॉयलेट इस्तेमाल करने से भी रोका गया | इस घटना के बाद भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी ने विरोध तेज करने के संकेत दिए हैं।

संसद के मानसून सत्र के दौरान विरोध प्रदर्शन के बीच आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने संसद परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें संसद परिसर में स्थित शौचालय (वॉशरूम) का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी गई। इस घटना के विरोध में उन्होंने संसद परिसर में ही धरना शुरू कर दिया। चंद्रशेखर ने कहा कि एक निर्वाचित सांसद के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। घटना के बाद संसद परिसर में कुछ समय के लिए राजनीतिक माहौल गर्म हो गया।

सुरक्षा कर्मियों के व्यवहार पर उठाए सवाल

चंद्रशेखर आज़ाद ने आरोप लगाया कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने शौचालय जाने की अनुमति मांगी तो उन्हें रोक दिया गया। उनके अनुसार यह केवल व्यक्तिगत असुविधा का मामला नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने मांग की कि पूरे घटनाक्रम की जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनुचित व्यवहार हुआ है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उनके समर्थकों ने भी इस घटना को लेकर नाराजगी जताई और इसे सांसदों के अधिकारों से जुड़ा विषय बताया।

CJP आंदोलन के समर्थन में पहले से कर रहे थे विरोध

चंद्रशेखर आज़ाद पिछले कुछ दिनों से छात्रों के आंदोलन और CJP (Cockroach Janata Party) से जुड़े प्रदर्शन का समर्थन कर रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने संसद परिसर और जंतर-मंतर पर छात्रों के समर्थन में धरना दिया था तथा पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। उनका कहना है कि छात्रों की मांगों को दबाने के बजाय सरकार को उनसे संवाद करना चाहिए। इसी क्रम में संसद परिसर में उनका विरोध जारी था, जिसके दौरान यह नया विवाद सामने आया। विपक्षी दल भी लगातार छात्रों के मुद्दे और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेर रहे हैं।

राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज

घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। विपक्षी नेताओं ने मामले को लोकतांत्रिक अधिकारों और जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जोड़ते हुए सवाल उठाए, जबकि आधिकारिक स्तर पर इस मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। संसद के मानसून सत्र के दौरान छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पहले से ही चर्चा का विषय बने हुए हैं। ऐसे में चंद्रशेखर आज़ाद के इस आरोप ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर बहस तेज होने की संभावना है।

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