11 साल बाद खत्म हुआ कोयला घोटाला केस, सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व PM मनमोहन सिंह के खिलाफ कार्यवाही की बंद

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सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ कोयला ब्लॉक आवंटन मामले को बंद कर दिया है। अदालत ने 2015 का समन रद्द करते हुए सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली।

नई दिल्ली। करीब 11 साल पुराने कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया है। अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने का आधार नहीं बनता। इसके साथ ही इस मामले में उनके खिलाफ लंबी कानूनी प्रक्रिया का अंत हो गया।

2015 में समन जारी होने के बाद शुरू हुआ था विवाद

यह मामला उस समय चर्चा में आया था जब वर्ष 2015 में विशेष सीबीआई अदालत ने कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में मनमोहन सिंह समेत अन्य लोगों को समन जारी किया था। बाद में इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई और आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी गई। जांच के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि उपलब्ध रिकॉर्ड में पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ किसी आपराधिक साजिश या भ्रष्टाचार का पर्याप्त प्रमाण नहीं मिला। इसी आधार पर एजेंसी ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी।

11 साल बाद कानूनी विवाद का हुआ अंत

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद उसे स्वीकार कर लिया और कहा कि इस मामले में आगे आपराधिक कार्यवाही जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत के फैसले के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ यह मामला औपचारिक रूप से बंद हो गया। यह वही मामला था जिसने एक समय देश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था और संसद से लेकर अदालत तक लगातार बहस का विषय बना रहा।

राजनीतिक और कानूनी बहस फिर तेज

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस ने इसे पूर्व प्रधानमंत्री के लिए न्याय की जीत बताया है, जबकि इस मामले का उल्लेख वर्षों तक भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित विवादों में होता रहा। अदालत के फैसले के साथ अब इस प्रकरण की कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त हो गई है। लगभग एक दशक से अधिक समय तक चले इस मामले का अंत भारतीय न्यायिक इतिहास के महत्वपूर्ण फैसलों में शामिल माना जा रहा है।

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